Thu Oct 21
Issyoga

भगवान विष्णु, सृष्टिकर्ता ब्रह्मा एवं महारुद्र की सम्मलित शक्ति त्रेता युग में राजा रत्नाकर सागर एवं महारानी विजया के घर पुत्री बनकर अवतरित हुई तथा माता वैष्णो देवी के रूप में भक्तों का कल्याण करने के लिए त्रिकुट पर्वत की सुरम्य गुफा में वास करने लगीं | कलियुग के अंतिम चरण में माता वैष्णो देवी ने सद्गुरु महात्मा सुशील कुमार एवं माँ विजया को साधनावस्था में साक्षात् दर्शन देकर यह अनुभूति कराइ की संतप्त मानव जाती के उद्दार एवं भक्तों के कल्याण तथा उनकी भौतिक कामनाओं की पूर्ति हेतु वे जनसाधारण के लिए सुलभ हो ऐसे स्थान में आना चाहती हैं| 

महाशक्ति के आदेशानुसार सद्गुरु महात्मा सुशील कुमार ने दिव्य शरीर धारण कर श्री के. एस. वर्मा एवं श्रीमती वंदना वर्मा के माँ स्मृति पर्यावरण काम्प्लेक्स स्थित निवास स्थान के पूजा घर में May 2000 को शुभ मुहूर्त में सात पिंडों की अस्थाई रूप से स्थापना की, जिसमे माता वैष्णो देवी अपनी समस्त शक्तियों के साथ माता मनोकामना देवी के रूप में विराजमान होकर भक्तों की भौतिक मनोकामनाएं पूर्ण करने लगीं|

शक्तिपिंड मनोकामना देवी की प्राण प्रतिष्टा के समय सद्गुरु महात्मा सुशील कुमार ने यह भविष्यवाणी की थी की आनेवाले समय में यह पूजाघर भक्तों के लिए छोटा पर जायेगा और शक्तिपिंड मनोकामना देवी की अन्यंत्र बड़े स्थान पर स्थापना करनी परेगी|

24 अप्रैल 2002 को सद्गुरु महात्मा सुशील कुमार के भौतिक शरीर त्यागने के पश्चात श्री के . एस . वर्मा को सद्गुरु की प्रेरणा प्राप्त हुई और उन्होंने वर्तमान मंदिर का निर्माण आरम्भ करवाया | 6 माह की अल्प अवधि में इस मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो गया|

सद्गुरु महात्मा सुशील कुमार के अवतार दिवस 13 जुलाई 2003 को आसाढ़ शुक्ल पूर्णिमा (गुरुपूर्णिमा ) के शुभ अवसर पर माता माँ विजया के कर कमलों से शक्तिपिंड माँ मनोकामना देवी की स्थाई स्थापना संपन हुई|

In the state of Samadhi, Reverend Gurudev had the vision of Ma Vaishno Devi. Ma Vasihno directed Gurudev to establish ‘Shakti-Pind’, where Mata Vaishno with her complete divine power in the state of oneness with universe, will physically reside in the form of ‘Mata Manokamna’. On 5th-6th October, Gurudev and Guruma, in their divine form supplicated Mata Vaishno with heart felt sincerity and since then Ma Vasihno has been physically residing in the form of ‘Ma Manokamna’ in the seven ‘Pinds’. However, ‘Shakti-Pinds’ were temporarily established in the residence of Sri K S Verma, Secretary of International Issyoga Society in New Delhi. It was on 13th July, 2003 that within the premises of the house of Sri K S Verma, Ma Manokamna Mandir took a permanent form as a temple.

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