Thu Oct 21

कहावत है पहला सुख निरोगी काया। अर्थात स्वस्थ रोगरहित शरीर। शरीर अगर निरोगी अथवा रोगरहित है, स्वस्थ है तो वह सबसे सुखी व्यक्ति है। स्वस्थ शरीर रहने पर ही मनुष्य अन्य सुखों का उपभोग कर सकता है। आरोग्य के अभाव में मनुष्य की छोटी-छोटी खुशियाँ भी उससे छिन जाती है। संसार तो वैसे भी दुःखों से भरा पड़ा है ऐसे में यदि आरोग्य न हो तो जीना दूभर हो जाता है।

स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोगों का न होना अर्थात्  absence of disease  नहीं है। चरक संहिता में कहा गया है

आत्मः इन्द्रिय मनः स्वस्थः। स्वस्थ्य इति अवधीयते।
जिसकी आत्मा, मन एवं इन्द्रियाँ स्वस्थ है वही वास्तव में स्वस्थ है।