Thu Oct 21
Anubhuti of Pintu Sahu
1996 की बात है जब मेरा ऑपरेशन होने वाला था | परिवार के सभी सदस्य थे तो मुझे हिम्मत थी कि सब मेरे पास ही है लेकिन जब ऑपरेशन के लिए बेहोस किया गया तो ज्यों - ज्यों बेहोशी बढ़ती गइ मुझे लगा कि इस दुनिया में मेरा कोइ नही है और सिर्फ़ मै अकेला अंत्रिक्ष में भटक रहा हूं क़रीब 1 घंटा मुझे ऐसा लगता रहा, जब चेतना लौटी तो उसी पल से मुझे ऐसा लगने लगा कि सड़ा संसार मिथ्या है | मै भगवान से प्राथना करने लगा कि हे प्रभु हमें सचे गुरु से मिला दीजिये जो ज्ञान देकर हमें सही रास्ते पर लगा दें | उसी पल से मैं सचे गुरु कि तलाश में था |

मेरे घर में 1997 से ही ब्रह्म प्राप्ति एवं रोगमुक्ति में इस्स्योग नाम कि एक पुस्तक थी जो मेरी किरण आंटी ने डी थीन लेकिन प्रेरणा नही हुई पढने की | 1999 में जब बहुत बेचैनी हुआ | तब पुस्तक की याद आई और मैने सारी पुस्तक पढ़ डाली | मुझे बहुत अच्छा लगा सोचा यही सचे गुरु है | जिन्हें मै बर्सों से तलाश कार रहा था और उसी क्षण से मैंने इन्हें अपना गुरु मान लिया | मै हमेशा अशांत रहा करता था उसी पल से मुझे शांति महसूस होने लगी | मै 6 मार्च 1999 को दीक्षा लेकर साधना कर रहा हूँ एवं उनके बताये मार्ग पर चल रहा हूँ | प्रायः साधना में जो देखता हूँ वो सच हो जाता है | एक बार मैंने साधना में देखा कि दो ट्रेन के बीच में भयंकर टक्कर हो गई और क्षत - बिक्षत लाश बिखरी हुई है | 8-10 दिन के अन्दर ही असम राज्य में ब्रह्म्पुत्र और अवध एक्सप्रेस दोनों ट्रेन आपस में टकरा गई ठीक उसी तरह जैसा मैंने देखा था | 22 सितम्बर 2000 को मै सुबह साधना में बैठा था, मेरे आँख से लगातार अश्रुपात हो रहा था, मैंने देखा गणेश जी बैठे है और उनक नेत्र पर ॐ दिव्य प्रकाश से प्रकाशित हो रहा है फिर देख रहा हूँ गुरुदेव एवं माताजी पानी में बैठे है | मै जब साधना कर उठा तो हतप्रध राह गया | गुरुजी एवं माताजी के तस्वीर के पास पानी गिरा हुआ था चूँकि उस वक्त लगातार 6-7 दिन से बारीश होने कि वजह से दीवाल से रिस्कर पानी आया था | उसी दिन मै महानंदा ट्रेन से पाटना आ रहा था | 9 बजे के आस - पास मै साधना में था उस समय गुरुदेवजी एवं माताजी का दर्शन हुआ दोनों खुश मुद्रा में थे कुछ क्षण के बाद गुरुजी को वहाँ नही पाया तो मै बेचैन हो उठा कि अभी यहीं थे कहाँ चले गए | देखता हूँ गुरुजी ट्रेन के आगे खड़े है | कुछ क्षण के बाद ट्रेन भी रुकी तभी मेरा ध्यान भंग हो गया पता लगा कि शाहपुर कमाल में ट्रेन का स्टॉपेज नही है परंतु रुक गई थी रुकने के 2 मिनट बाद पुनः ट्रेन चली | पुनः मै देखता हूँ कि गुरुदेव जी ट्रेन को रोके खड़े है, और ट्रेन रुकी | 2 मिनट के बाद ब्रह्म्पुत्र मेल, भागलपुर होकर जाती थी पटरी उखड़ने की वजह से बरौनी होकर आई थी | बरौनी से कटिहार तक सिंग्ल लाइन है | उस दिन गुरुजी कि कृपा से मै क्या ट्रेन के सभी यात्री बाल - बाल बच गये |

13 नवंबर को मै खेत बोअने के लिए टेलर से जा रहा था, रास्ते में नाले में टेलर पलट गया जिस खाद, बीज एवं कल्टीवेटर लदा हुआ था | 3 लेवर भी थे एक लेवर तो कल्टीवेटर कि नीचे आ गया था फिर भी उसे कुछ नही हुआ | उस दिन भी मै गुरु कृपा से ही धन - जन दोनों कि क्षति से बचा | इधर दिसम्बर महीने में ही मै 7.45 वाले साधना में देखा कि ज्वालामुखी से धुवाँ निकाल रहा है उसके बाद उसमें से आग निकलने लगा उस समय तो जन कल्याण का साधना होता है | मैंने शांति के लिए गुरुदेव जी एवं माताजी से प्रार्थना किया, ठीक वही सीन मैंने 12-16 को राष्ट्रीय सहारा में पोपो कैट्पेल ज्वालामुखी देखा |

पिंटू साहू
साहू परवता , भगलपुर
 


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