Thu Oct 21
Anubhuti of Anant Kumar Sahu

"कौन बिगाड़ सके उसका सदगुरु जिसके रखवाले हैं"



मै जब से गुरु - शरण में आया हूँ मुझे एक से एक अद्बभुत अनुभूति तथा सुखद अनुभव हो रहा हैं| मेरी कुछ अनुभूति द्वारा रचित इस्स्योग पुस्तक तथा इस्स्योग संदेश पत्रिका में छप चुका है| अनुभुतिओ का क्रम इतना अधिक है कि अब उसे कहने में मुझे कं लग रहा है| मेरा इस्स्योग में जन्म लिए हुए लगभग दो वर्ष होने जा रहा है| गुरुदेव एवं माताजी कि कृपा से अचछि-से-अचछि साधना /अनुभूति होती हैं तथा कै गुरुतर रहस्य धीरे-धीरे समझ में आ रहे हैं| तत्काल जो रोजमर्र्रा कि अनुभूति हो रही हैं| उससे भी अधिक गहराई में जाना चाहता हूँ| मेरा पड़ाव उससे ऊपर का हैं| परन्तु दिनांक 22.1.2000 को क़रीब दो ढाई सौ साधकों तथा गुरुदेव एवं माता जी कि उपस्थित में जो घटना घटी हैं उसे बय्क्त किए बिना में राह नही सकता| घटना इस प्रकार हैं:-

दिनांक 22.1.2000 गुरुदेव एवं माता जी को सत्संग हेतु दिल्ली जाने के लिए विदा करने हेतु पाटना जंक्सन स्टेशन आया था | गुरुदेव एवं माता जी को मगध एक्सप्रेस पर चढ़ा दिया तथा ट्रेन खुलने का इंतज़ार हो रहा था | बोगी के गेट पर गुरुदेव एवं माता जी प्राइम भाव से बिह्ववल होकर सभी साधकों को आशीर्वाद दे रहे थे| भीड़ काफी थी| गुरुदेव गुरुदेव एवं माता जी को विदा करने में इतना ध्यान मगन था कि अगल बगल क्या हो रहा हैं उसका भान नही था | ट्रेन खुलने के ठीक 5-7 मिनट पहले एकाएक मुझे सूक्ष्म मानसिक संकेत हुआ कि मेरा पर्स पाकेटमारी हो गया | मैंने पीछे जेब में हठ डाला तो सही में पर्स गायब था | में हैरत में पड़ गया |

मुझे लगा कि प्रभु गुरुदेव एवं माता जी कि वह कौन सि लीला हैं कि उनकी उपस्थित में मेरा पर्स मारा गया | भीड़ में मेरे बगल में मंजू दीदी थी उन्हें मैंने बताया कि दीदी मेरा पर्स मारा गया | मैंने यह भी कहा कि पर्स कि चिंता मुझे नही हैं चिंता इस बात कि हैं कि पर्स में दो भजन -"एक सतगुरु का (उल्लेख्ननीय हैं कि इस भजन का रियाज़ कार रहा हूँ अत: वह पर्स में था) तथा दूसरा भजन मंजू दीदी के लिए दिल्ली कि शिवकुमारी दीदी ने दिया था जो 2.1.2000 से मेरे पर्स में ही था" पाकेटमार उसे कैसे ले जाएगा | मुझे पाकेटमार पर दया आने लगी क्योंकि मुझे यह अनुभव हो गया कि पाकेटमार तुरंत पकड़ा जयेगा और लोग उसे मरेंगे तथा पुलिस में दे देंगे |

मंजू दीदी से यह बार्ता कर ही राह था कि पूर्व दिशा से हल्ला हुआ कि पाकेटमार पकड़ा गया | में भी वहाँ गया तथा बोला कि मेरा भी पर्स उसने मारा हैं | लोगो ने पाकेटमार को चैक किया तथा उसके पास से सिर्फ़ मेरा ही पर्स बरामद हुआ | पर्स चैक किया एवं पाया कि उसमें रखा भजन एवं समान आदि सुरक्षित हैं | मैंने भीड़ से ही गुरुदेव एवं माता जी पर्स दिखाया | गुरुदेव बोले मिल गया न! पाकेटमार को कोइ नही मरना | गुरुदेव कि भंगीमा देखने से लग रहा था कि वे सभी बात पहले से ही जान रहे हैं | इसी बीच तीन - चार लोग पाकेटमार को घेर लिए कि 3-4 लोगों का पर्स मारा था | पर यह बात सही थी कि उस पाकेटमार ने 3-4 लोगों का पर्स नही मारा था | वे तो दूसरे थे जो फरार हो चुके थे परंतु मेरा पर्स मरने वाला पकड़ा गया | उपस्थित सभी साधक जनता यह सोचने के लिए बढ़ाया हो गए कि कौन बिगाड़ सके उसका गुरुदेव माता जी जिनके रखवाले हैं , पर्स प्राप्त होते ही मैंने पर्स से मंजू दीदी का भजन निकाल कर उन्हें दे दिया |

दिनांक 23.1.2000 के लगभग दो बजे दिन में कल कि घटना पर बिचार कर रहा था, गुरुदेव एवं माता जी कि याद में रोने लगा, यहाँ में बता देना चाहता हूँ गुरुदेव माता जी के पटना रहने पर भी उनसे एकान्त होने पर गुरुदेव-माता जी का ध्यान होता रहता हैं तथा आंख्नो से अश्रुपात होता हैं - इसी क्रम में मैं ध्यान में चला गया | तब देखता हूँ कि गुरुदेव एवं माता जी मेरे कमरे में प्रवेश किए| और में उन्हें खुश होकर देखने लगा कुछ देर बाद वे दोनों कमरे से गायब हो गए | उन्हें कमरे में नही देखकर में जोर - जोर से रोने लगा उन्हें खोजने लगा | मेरे पुत्र ने बताया कि गुरुदेव एवं माता जी छत पैर धूप में बैठे हैं | मै छत पैर जाने लगा था कि गुरुदेव एवं माता जी पुनः मेरे कमरे में आ गये| वे बड़े प्यार के साथ मेरे पास आये | उनके पूरे शरीर में प्रकाशित तैज़ में इतनी दया एवं करुणा प्रवाहित हो रही थी कि इसका सुखद अनुभव मुझे अभी भी हो रहा हैं | वह भुलाने वाला अनुभव नही हैं | मै आपने बिस्तर से उतर कर उन्हें साश्टांग दंड्वत कर प्रणाम किया | गुरुदेव ने मेरा ललाट पकड़ कर कुछ क्रिया किया | इस क्रिया के साथ ही मेरे शरीर से प्रकाश ही ज्वाला निकलने लगी और में बहुत बैग में झूमने लगा | उनके हाथ का दबाव बहुत कठोर एवं अथाह शक्ति भरा कई टनों से भी अधिक वजनी था | गुरुदेव के दबाव से मेरा शरीर स्थिर हो गया पर गार्डन पते कि भाँति डोल रहा था तब गुरुदेव ने दोनों ठेहुना से सर को पकड़ लिया | अब सर भी स्थिर हो गया | गुरुदेव बोले कि अब ठीक हैं गुरदेव एवं माताजी ने मेरे पूरे शरीर का निरीक्षण किया माताजी ने गुरुदेव को कुछ इशारा किया तब गुरुदेव ने मुझे चित लेटा कर मेरे लीवर स्थान तथा प्रेंक्रियाज स्थान पर कोइ क्रिया किया | तत्पश्चात मुझे घनघोर निंद्रा आने लगी और मै गुरुदेव से बोला कि मुझे नींद आ रही है | गुरुदेव ने कहा कि आपको सोना नही है | जबावदेह ऑफिसर है आपको नींद में सोना नही है | अब मै स्थिर होकर बिस्तर से उठ गया | आंखों से लगातार अश्रुधार प्रवाहित हो रहा था | शाम को गुरु धाम जाने तक अश्रुपात होते रहा | मैने इस घंटा कि जानकारी माताजी एवं गुरुदेव को रात्रि 9.30 बजे दिल्ली फ़ोन पर दिया - वे बोले कि इतनी नैसर्गिक अनुभुतियां हो रही हैं| उसके बाद भी लोग (साधक - साधिका) समझे तब ना......|

उपरोक्त घटना गुरु पर विश्वास का दिव्य आशीर्वाद हैं | गुरु आपने भक्तों कि रक्षा एवं खुशी के लिए हर पल उनके साथ रहकर उनकी रक्षा करते हैं | उनके हर बात-ब्यवहार में रहस्य रहता हैं |

यह अनुभूति गुरुधाम में गाये जाने वाले भजन-राधे-राधे बोलो चले आयेगे बिहारी ...... को साकार करता हैं | गुरुदेव-गुरु माता हमारे अन्दर हैं| हमने जब भी उन्हें आवाज़ दिया हैं वे हमारी रक्षा, हमारे कल्याण, हमारे मार्ग-दर्शन के लिए तत्क्षण आ खड़े हुए हैं | लेकिन भगवान (गुरुदेव-माताजी) के प्रति हमारी भी जिम्मेदारियाँ हैं कि उनके दिव्य संदेश को संपूर्ण ब्रह्मांड में फैलाये ताकि इस ब्रह्मांड के त्रश्त सभी जीवों का कल्याण हो सके -

जय गुरुदेव, जया माताजी
अनंत कुमार साहू
आई. ओ. सी. रोड सिपारा पट्ना

 


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